गिरीश तिवारी।रवि सिंह
दुद्धी।सोनभद्र– दुद्धी ब्लॉक में इन दिनों करीब 1 करोड़ 52 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित 24 विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं और स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि टेंडर को पहले से ही “मैनेज” करने की कोशिश की गई।जानकारी के अनुसार, इन कार्यों में सीसी रोड, नाली निर्माण, टीन शेड, हाई मास्क लाइट समेत अन्य विकास कार्य शामिल हैं। ये कार्य पंचम राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग की योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में कराए जाने प्रस्तावित हैं।बताया गया कि इन कार्यों के लिए 27 फरवरी 2026 को अखबार में निविदा प्रकाशित की गई थी। इसके तहत 28 फरवरी से 9 मार्च तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक निविदा फॉर्म लेने का समय निर्धारित किया गया था। तय कार्यक्रम के अनुसार 13 मार्च को दोपहर करीब 1 बजे तक ठेकेदारों को अपनी दरों और आवश्यक दस्तावेजों के साथ टेंडर जमा करना था।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि पिछले कुछ दिनों से कुछ लोगों द्वारा टेंडर को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। आरोप है कि कुछ ठेकेदारों पर दबाव बनाया गया कि वे फॉर्म वापस कर दें और निविदा प्रक्रिया में हिस्सा न लें। हालांकि दो ठेकेदारों ने फॉर्म खरीदकर प्रक्रिया में भाग लिया।इस बीच यह भी आरोप सामने आया कि नियम के अनुसार टेंडर के लिफाफे सभी उपस्थित लोगों के सामने नहीं खोले गए। सामान्य तौर पर निविदा प्रक्रिया में ठेकेदारों और समिति के सामने ही लिफाफे खोलकर कागजात की जांच की जाती है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। लेकिन यहां ऐसा नहीं होने से टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ब्लॉक में अक्सर नियमों की जगह मनमानी देखने को मिलती है। उनका कहना है कि कई बार पहले से ही तय कर लिया जाता है कि किसे काम दिया जाएगा। जो लोग इस व्यवस्था से सहमत हो जाते हैं, उनका काम आसानी से हो जाता है, जबकि विरोध करने वालों को प्रक्रिया से अलग कर दिया जाता है।इस मामले में खंड विकास अधिकारी राम विशाल चौरसिया ने कहा कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार की गई है और सभी लोग संतुष्ट हैं। जब उनसे पूछा गया कि टेंडर लिफाफा सभी के सामने क्यों नहीं खोला गया, तो उन्होंने कहा कि पहले ऐसा करने पर एक व्यक्ति लिफाफा लेकर भागने लगा था, इसलिए अब इस तरह से प्रक्रिया नहीं की जाती। सुरक्षा व्यवस्था के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रशासन को अलग से सूचना देने या अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
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