लोढ़ी गांव का तालाब खाली कराने पर ग्रामीणों में आक्रोश, 79 लाख के ‘सुंदरीकरण’ पर उठे सवाल

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AKD।गिरीश तिवारी

सोनभद्र
राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत लोढ़ी गांव में तालाब के सुंदरीकरण को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव का वह तालाब, जो सालभर पानी से भरा रहता है और आसपास के तीन-चार गांवों के लिए प्रमुख जलस्रोत माना जाता है, उसे “सुंदरीकरण” के नाम पर खाली कराया जा रहा है।पिछले तीन दिनों से तालाब का पानी लगातार निकाला जा रहा है। इससे ग्रामीणों में चिंता और नाराज़गी है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी का मौसम सामने है और यही तालाब पशुओं व ग्रामीणों की प्यास बुझाता है। ऐसे समय में इसे पूरी तरह खाली करना आने वाले दिनों में पानी की समस्या खड़ी कर सकता है।सूत्रों के अनुसार तालाब के सुंदरीकरण के लिए करीब 79 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है।

योजना के तहत तालाब की गहराई बढ़ाने, किनारों को मजबूत करने और भिटे पर ब्रेच निर्माण जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। ठेकेदार का कहना है कि तकनीकी रूप से काम करने के लिए तालाब से पानी निकालना जरूरी है और वे स्वीकृत योजना के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं।वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि काम चरणबद्ध तरीके से भी किया जा सकता था। पूरे तालाब को एक साथ खाली करना जरूरी नहीं था। उनका कहना है कि विरोध के बावजूद काम जारी है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह तालाब कई दशकों से कभी पूरी तरह नहीं सूखा और अन्य जलस्रोत खत्म होने के बाद भी यह गांव की जीवनरेखा बना रहा।

जल संरक्षण से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसे कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी होती है। आंशिक जल निकासी कर भी काम संभव था, जिससे जलस्रोत सुरक्षित रहता और विकास कार्य भी हो जाता।ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि कहीं यह योजना सिर्फ बजट खर्च करने तक सीमित न रह जाए। 79 लाख रुपये की राशि के उपयोग में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।फिलहाल तालाब का पानी बह रहा है और गांव में चिंता बढ़ती जा रही है। अब देखना यह होगा कि यह सुंदरीकरण गांव के लिए राहत साबित होता है या आने वाले दिनों में जल संकट को और गहरा कर देता है।

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