गिरीश तिवारी
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में बिजली उत्पादन और विद्युत व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए उत्तर प्रदेश विधान परिषद की प्रदेशीय जांच समिति शनिवार को सोनभद्र पहुंची। समिति ने ओबरा क्षेत्र में स्थित विद्युत उत्पादन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करते हुए ओबरा थर्मल पावर प्लांट के प्लांट-C और बी परियोजना के सभी यूनिटों की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उत्पादन क्षमता, तकनीकी व्यवस्था, मशीनों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों का बारीकी से परीक्षण किया गया तथा अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई।निरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति अंगद कुमार सिंह, एमएलसी विनीत सिंह सहित समिति के अन्य सदस्यों ने प्लांट की वर्तमान कार्यप्रणाली और उत्पादन व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों से बिजली उत्पादन की स्थिति, तकनीकी चुनौतियों और रखरखाव से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत जानकारी ली गई। समिति ने स्पष्ट निर्देश दिया कि विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, सुचारू और निर्बाध बनी रहनी चाहिए तथा सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

समिति ने ओबरा-सी परियोजना और बी परियोजना के सभी यूनिटों की कार्यप्रणाली की भी विस्तार से समीक्षा की। मशीनों के संचालन, मेंटेनेंस व्यवस्था और उत्पादन क्षमता को लेकर अधिकारियों से सवाल-जवाब किए गए। इसके साथ ही अनपरा और ओबरा क्षेत्र में बिजली व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद आयोजित बैठक में प्लांट की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्थाओं और उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। इस दौरान कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और परियोजना की वर्तमान स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में प्लांट के मुख्य महाप्रबंधक आर.के. अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर मौजूद रहे।

दौरे के दौरान एमएलसी विनीत सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक गंभीर पहल है। उन्होंने कहा कि ओबरा और रॉबर्ट्सगंज में अधिकारियों के साथ बैठकों के माध्यम से बिजली विभाग की व्यवस्थाओं की गहराई से समीक्षा की जा रही है, ताकि जहां भी कमियां हैं उन्हें तुरंत दूर किया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिजली की बर्बादी यानी लाइन लॉस को कम करना और व्यवस्थाओं को पूरी तरह अनुशासित बनाना इस दौरे का मुख्य उद्देश्य है।

विनीत सिंह ने बताया कि ओबरा में 660-660 मेगावाट की दो आधुनिक इकाइयां संचालित हैं जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 1320 मेगावाट है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था में इन इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि उत्पादन निरंतर बना रहे। उन्होंने जानकारी दी कि एक इकाई पिछले तीन दिनों से मेंटेनेंस के कारण बंद है, लेकिन आवश्यक तकनीकी कार्य पूरा होते ही उसे जल्द ही पुनः चालू कर दिया जाएगा ताकि उत्पादन क्षमता पूरी तरह बहाल हो सके।

मीडिया द्वारा ओबरा क्षेत्र में उड़ने वाली राख और प्रदूषण से जुड़े सवालों पर विनीत सिंह ने स्पष्ट कहा कि सरकार इस विषय को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और इसके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राख को ढककर और बंद गाड़ियों में सुरक्षित ढंग से ले जाने की व्यवस्था की जा रही है, साथ ही समय-समय पर पानी का छिड़काव और अन्य तकनीकी उपाय भी लागू किए जा रहे हैं ताकि आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का प्रभाव कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब ये प्लांट दशकों पहले स्थापित किए गए थे तब यहां आबादी बहुत कम थी, लेकिन समय के साथ बसावट बढ़ी है, इसलिए अब पर्यावरणीय संतुलन और जनसुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है।

समिति ने निरीक्षण के बाद कहा कि पूरे दौरे की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जिसमें विद्युत व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आवश्यक सुझाव भी शामिल होंगे। वहीं समिति का कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। 15 मार्च को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सोनभद्र की विद्युत व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति और सुधारात्मक कदमों पर चर्चा की जाएगी।
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