
सोनभद्र। डिजिटल दुनिया जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराध और डेटा चोरी का खतरा भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में साइबर सुरक्षा और गोपनीयता आज सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो गई हैं। इन्हीं चुनौतियों और उनके समाधान पर मंथन के लिए सोनभद्र के राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज और एमएनएनआईटी इलाहाबाद ने संयुक्त पहल की है। दोनों संस्थानों के तत्वावधान में पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसमें विशेषज्ञों ने साइबर खतरों से निपटने, डेटा सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता मजबूत करने के तकनीकी उपायों पर चर्चा की। साइबर दुनिया में सुरक्षा और गोपनीयता की चुनौतियां अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि आम आदमी की जिंदगी और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ चुकी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एमएनएनआईटी इलाहाबाद और राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सोनभद्र के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय लघु अवधि पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। सिक्योरिटी एंड प्राइवेसी इन साइबर वर्ल्ड : चैलेंजेस एंड सॉल्यूशंस विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन एमएनएनआईटी इलाहाबाद के कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर एम.एम. गोरे ने किया। इस दौरान सीएसई विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मयंक पांडेय, आरईसी सोनभद्र के सीएसई विभागाध्यक्ष डॉ. आमोद कुमार तिवारी और अधिष्ठाता शैक्षणिक डॉ. हिमांशु कटियार भी मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रोफेसर एम.एम. गोरे ने पीएचपी वल्नेरेबिलिटी और बिटकॉइन से जुड़ी वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर साइबर खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए प्रभावी और मजबूत समाधान विकसित करने का आह्वान किया। वहीं प्रोफेसर मयंक पांडेय ने कहा कि आज की डिजिटल दुनिया में नेटवर्किंग और संवाद जरूरी हैं, लेकिन सुरक्षा की कीमत पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
वहीं आरईसी सोनभद्र के निदेशक प्रोफेसर के.एस. वर्मा ने इस संयुक्त शैक्षणिक पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के साथ लोगों को रोजमर्रा के साइबर जोखिमों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. दिनेश सिंह ने डेटा सुरक्षा को मौजूदा दौर की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल बताते हुए कहा कि तकनीकी रूप से सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था विकसित करने के लिए ऐसे विशेष प्रशिक्षण बेहद जरूरी हैं। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में एमएनएनआईटी इलाहाबाद के डॉ. दिनेश सिंह ने साइबर सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों और मशीन लर्निंग की उपयोगिता पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फर्जी समीक्षाओं यानी रिव्यू स्पैम की पहचान में मशीन लर्निंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग तकनीक के इस्तेमाल को समझाया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन आधुनिक तकनीकों के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी गतिविधियों की पहचान कर उनकी विश्वसनीयता और प्रामाणिकता को मजबूत किया जा सकता है। पांच दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और उभरती तकनीकी चुनौतियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। उद्घाटन सत्र का समापन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मैनेजर यादव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस मौके पर डॉ. जे. सतीश कुमार, डॉ. अनुराग सेवक, डॉ. आशीष रंजन मिश्रा, डॉ. कल्पना सिंह, डॉ. पी.के. वर्मा सहित कई शिक्षक और प्रतिभागी मौजूद रहे।
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