
सोनभद्र में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। SATYA SANATAN TRUST के नाम से पंजीकृत बैंक खाते के जरिए हुए करीब 2 करोड़ 37 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन से जुड़े मामले में पुलिस ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तीन और वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ ही मामले में मुख्य अभियुक्त समेत अब तक कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से हुंडई अमेज कार भी बरामद की गई है। पुलिस की जांच में साइबर ठगी की रकम को ट्रस्ट के बैंक खातों में मंगाने, कमीशन बांटने और अलग-अलग संस्थाओं के बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन के तार सामने आए हैं। अब पुलिस इन वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, ताकि पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सके।मामला सिर्फ एक बैंक खाते में करोड़ों रुपये आने का नहीं है, बल्कि जांच में साइबर धोखाधड़ी की रकम को ट्रस्ट के नाम से पंजीकृत बैंक खातों में मंगाए जाने का पूरा नेटवर्क सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, समन्वय यानी JMIS पोर्टल के माध्यम से SATYA SANATAN TRUST के नाम से पंजीकृत बैंक खातों की जांच की गई। इसमें साइबर फ्रॉड से संबंधित 35 शिकायतों में करीब 11 करोड़ 63 लाख रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी सामने आई। जांच के दौरान एक बैंक खाते में लगभग 2 करोड़ 37 लाख रुपये प्राप्त होने का पता चला। इसी मामले में दुद्धी थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की थी। पुलिस जांच के मुताबिक, ट्रस्ट के संचालक हरिकेश पाण्डेय उर्फ ऋषिकेश पाण्डेय ने ट्रस्ट के नाम से बैंक खाता खुलवाया था। आरोप है कि खाते का नंबर और एटीएम कार्ड मध्य प्रदेश के कुछ लोगों को उपलब्ध कराया गया। साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि ट्रस्ट के बैंक खातों में मंगाई जाती थी। इसके बदले ट्रस्ट के अध्यक्ष को 20 प्रतिशत कमीशन दिए जाने और बाकी रकम आपस में बांटने की बात भी जांच में सामने आई है। हालांकि, इस पूरे वित्तीय नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका रही, यह विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट होगा।इसी कड़ी में सोनभद्र पुलिस की टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर मध्य प्रदेश के भोपाल में दबिश दी। 25 अक्टूबर को रात करीब 8 बजकर 5 मिनट पर थाना अयोध्या नगर क्षेत्र के सी-सेक्टर तिराहे पर यादव टी-स्टाल के पास से तीन वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इनमें जय कुमार पाण्डेय, राजेश पोद्दार और बब्बू प्रसाद प्रजापति शामिल हैं। तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर सोनभद्र लाया गया। नियमानुसार विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद 28 अक्टूबर को उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए रवाना किया गया। पुलिस ने इनके कब्जे से एक हुंडई अमेज कार भी बरामद की है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई 25 अक्टूबर से लगातार जारी है। पहली कार्रवाई में दुद्धी रेलवे स्टेशन परिसर रोड से मुख्य अभियुक्त हरिकेश पाण्डेय उर्फ ऋषिकेश समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें अंजनी कुमार और वेदान्त मौर्या शामिल हैं। इसके बाद 26 अक्टूबर को म्योरपुर थाना क्षेत्र के रनटोला तिराहे से दो अन्य वांछित अभियुक्त प्रवेश राज सिंह और जोनसीन क्रिशायान उर्फ राजेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई में दो मोबाइल फोन बरामद हुए थे। अब भोपाल से तीन और गिरफ्तारियां होने के बाद कुल गिरफ्तार अभियुक्तों की संख्या आठ हो गई है। जांच का दायरा अब केवल SATYA SANATAN TRUST तक सीमित नहीं है। पुलिस के मुताबिक, धर्मोदय फाउंडेशन, बलसा कन्स्ट्रक्शन एंड ट्रेडिंग LLP, भूमित्रम इंडिया माइक्रो फाउंडेशन ट्रस्ट और राष्ट्रीय स्वराज फाउंडेशन समेत अन्य संस्थाओं से जुड़े बैंक खातों में भी संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। धर्मोदय फाउंडेशन का पंजीकरण कर उसे चुर्क में स्थापित किए जाने और बलसा कन्स्ट्रक्शन एंड ट्रेडिंग LLP का संबंध म्योरपुर क्षेत्र के किरबिल से बताए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। इन संस्थाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। अब पुलिस इन खातों में रकम के आने-जाने और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।करोड़ों रुपये की साइबर धोखाधड़ी के इस मामले में दुद्धी थाने पर मुकदमा संख्या 281/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2), साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी में अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में चल रही कार्रवाई के तहत थाना दुद्धी पुलिस और सर्विलांस टीम ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर गिरफ्तारियां की हैं। कार्रवाई की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक ऑपरेशन ऋषभ रुणवाल, क्षेत्राधिकारी साइबर हर्ष पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी दुद्धी विनय प्रभाकर साहनी के पर्यवेक्षण में की गई। पुलिस अब मामले से जुड़े बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और अन्य संस्थाओं की भूमिका की जांच कर रही है। सवाल बड़ा है कि साइबर ठगी की रकम किन-किन रास्तों से होकर इन खातों तक पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और खुलासे होने की संभावना है।
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