बालकृष्ण के जन्मोत्सव की पावन कथा श्रवण करनें से हो जाती यह बात……

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सोनभद्र। सदर विकास खंड के करारी गांव में चल रहे श्री मद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर विन्ध्याचल से पधारे शरदा नंद के सुमधुर वाणी से भगवान् आनन्द कन्द श्री मन्नारायण आनन्द प्रदाता श्री कृष्ण के प्राकट्योत्सव के माध्यम से समस्त श्रोता समुदाय को आप्लावित कराते हुए चतुर्थ दिवस की पावन बेला में श्री मद्भागवत कथा के अन्तर्गत परम् भागवत् ध्रुव, प्रह्लाद, बलि, परम् भागवत् अम्बरीष जी के आध्यात्मिक कथाओं का तात्विक विवेचना करते हुए समस्त ग्रामवासियों को आध्यात्मिक भागवत् कथा में महाराज श्री ने सराबोर किया । भगवान श्री कृष्णचन्द्र के माध्यम से समस्त जनमानस को भक्ति परक पारमार्थिक पक्ष को रखते हुए दिव्य झांकी के माध्यम से भगवान् बालकृष्ण का भी मंगलमय दर्शन कराया गया महाराज श्री ने भागवत् कथा का सारांश बतलाते हुए कथा के अन्तर्गत कहा कि भक्त भगवान से प्रार्थना करता है। हे भगवन् स्नेह सिन्धु के भाव भंवर में मीन बनकर जल क्रीडा करते रहना चाहता हूं नेहनद्ध , श्रद्धोदक परात्पर प्रभु इस भयंकर भव भयाटवी में बिना ओर छोर के कब तक भटकता फिरुंगा भगवन् हे ह्रदय वल्लभ मैं तो तुम्हारी मनमोहक मधुमयी वाटिका के पाटल पुहपो का हि पराग पानें को उत्कण्ठित हो रहा हूं । इस अवसर पर यज्ञ के आचार्य प्रशान्त मिश्र, आचार्य संजय चौबे, आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी, आशीष मिश्र वैदिक सहित मुख्य यजमान गिरिधारी दूबे पत्नी सीता देवी एवं आयोजक सदानन्द पाठक सहित हजारों कि संख्या में भगवत्प्रेमी भक्तजन उपस्थित रहे।

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