उत्तर प्रदेश सरकार गांव गांव तक विकास पहुंचाने के लाख दावे करे लेकिन धरातल पर गांव के विकास के लिए जिम्मेदार सचिव प्रधान व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार के दावों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जहाँ लाखों करोड़ों खर्च के बाद आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई नही है। और वह नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। मामला कमासिन ब्लाक मुख्यालय की माडल ग्राम पंचायत कमासिन का है । जहाँ लोग नाली, खडंजा, आरसीसी, शौचालय, आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लोग दलदल भरे कीचड युक्त रास्ते से निकलने को मजबूर हैं। कहा जाता है कि साफ सफाई पर हर साल लाखो रुपये खर्च हो रहे हैं लेकिन लोगों का कहना है यहां बनी नालियों की सालों से सफाई नहीं हुई है जिससे पूरे रास्ते पर गंदा पानी फैल रहा है गांव में गंदगी का अंबार लगा है। लोग कीचड भरे रास्तों से निकलने को मजबूर हैं। लोगों का तो यह भी आरोप है कि विना कमीशन दिये सरकारी योजनाओं का लाभ नही दिया जा रहा है।फर्जीवाड़ा कर आवास बेचे जा रहे हैं । यह ग्राम पंचायत जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर लेकिन गांवों में विकास की गंगा बहाने वाली कमासिन ब्लाक कार्यालय इसी ग्राम पंचायत में स्थित है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जब इस ब्लाक मुख्यालय की माडल ग्राम पंचायत का यह हाल है तो बाकी का क्या होगा। इस ग्राम पंचायत में लगभग 10 हजार वोटर रहते हैं इसकी आवादी लगभग है यह ब्लाक की 55 ग्राम पंचायतों में सबसे बडी ग्राम पंचायत है।
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