सोनभद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। चोपन ब्लॉक में प्रसूता को वक्त पर अस्पताल की सुविधा नहीं मिली और मजबूरन बोलेरो वाहन में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस गांव तक पहुंचती ही नहीं। ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि क्या वाकई स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर सरकार के वादे सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं। कमसे कम जनपद सोनभद्र में हाल के दिनों में हुए मामलों को देखें तो कुछ ऐसा ही यहां होता दिख रहा। चोपन ब्लॉक के राजकीय महाविद्यालय के पास उस वक्त हड़कंप मच गया। जब प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को बोलेरो वाहन में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। आशा कार्यकर्ता की मौजूदगी में जच्चा-बच्चा दोनों तो स्वस्थ हैं। लेकिन इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की पोल खोल दी है। परिजनों का आरोप है कि ख़राब सड़क का बहाना बनाकर एम्बुलेंस गांव तक नहीं आती और मजबूर होकर ग्रामीण निजी वाहनों का सहारा लेते हैं। हाल ही में खुले आसमान के नीचे भी महिला का प्रसव हुआ था। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर कब सुधरेगी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था।
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