AKD।गिरीश तिवारी
सोनभद्र। वर्ष 2026 की होली को लेकर असमंजस की स्थिति के बीच धर्माचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि होलिका दहन 2 मार्च 2026 की देर रात, अर्थात 3 मार्च की भोर में भद्रा की पुच्छ काल में ही किया जाना शास्त्रसम्मत रहेगा।उन्होंने बताया कि 2 मार्च की शाम से भद्रा का प्रभाव प्रारंभ हो जाएगा और 3 मार्च की सुबह तक रहेगा। शास्त्रों में भद्रा के मुख में होलिका दहन निषिद्ध माना गया है, जबकि भद्रा की पुच्छ काल को शुभ और दोषमुक्त बताया गया है। इसी आधार पर 2 मार्च की रात 12:50 बजे से लगभग 2:02 बजे तक का समय दहन के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा।पंडित मनोज शुक्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि 3 मार्च को चंद्रग्रहण का संयोग होने के कारण उस दिन शाम के समय दहन करना शास्त्रसम्मत नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे परंपरा और धर्मशास्त्रों की मर्यादा का पालन करते हुए निर्धारित मध्यरात्रि मुहूर्त में ही विधि-विधान से होलिका दहन करें।उन्होंने कहा कि सही मुहूर्त में किया गया दहन ही कल्याणकारी होता है और उसी से समस्त नकारात्मकता का नाश होता है।
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