गुप्त नवरात्र में बन रहा बड़ा संयोग, साधना को करे यह उपाय

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  • न्यूज डेस्क: देवी आदि शक्ति की आराधना करने के लिए इस बार का गुप्त
  • नवरात्र 10 फरवरी से शुरू हो रहा है जो पूरे 9 दिन तक रहेगा 19 फरवरी को विजयदशमी के साथ
  • नवरात्रि की समाप्ति हो जाएगी श्रद्धालु निराहार या फलाहार रहकर माता की आराधना करेंगे घरों एवं मंदिरों में कलश की स्थापना तथा आदि शक्ति की उपासना भी होगी।
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पब्लिक भारत न्यूज डेस्क: देवी आदि शक्ति की आराधना करने के लिए इस बार का गुप्त नवरात्र 10 फरवरी से शुरू हो रहा है जो पूरे 9 दिन तक रहेगा 19 फरवरी को विजयदशमी के साथ नवरात्रि की समाप्ति हो जाएगी श्रद्धालु निराहार या फलाहार रहकर माता की आराधना करेंगे घरों एवं मंदिरों में कलश की स्थापना तथा आदि शक्ति की उपासना भी होगी। आचार्यों की माने तो गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है। यह 10 फरवरी से शुरू होगा। माघ शुक्ल प्रतिपदा 10 फरवरी (शनिवार) को धनिष्ठा नक्षत्र व वरीयान योग में गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है। यह नवरात्रि कलश स्थापना से शुरू होकर 19 फरवरी को विजयादशमी से साथ संपन्न होगी। श्रद्धालु निराहार या फलाहार रह कर माता की आराधना करेंगे। घरों एवं मंदिरों में कलश की स्थापना तथा शक्ति की उपासना होगी। गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना की प्रधानता होती है। इस नवरात्र में श्रद्धालु अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं तंत्र और शाक्त मतावलंबी साधना के दृष्टि से गुप्त नवरात्रों के कालखंड को बहुत सिद्धिदायी मानते हैं। इस बार के गुप्त नवरात्र में बहुत ही अच्छा योग बन रहा है जिसे लेकर अनेक प्रकार की सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास भी लोग करेंगे।

कई वर्षों में आता है दुर्लभ संयोग

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इस बार के गुप्त नवरात्र में ग्रह-गोचरों का अति पुण्यकारी संयोग बन रहा है, जो श्रद्धालुओं के मनोकामना पूर्ति करने वाला होगा। इस नवरात्र में पांच रवियोग, दो सर्वार्थ सिद्धि, चार जयद् योग, दो सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग, एक त्रिपुष्कर व सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। गुप्त नवरात्रि में पूजा का अवश्य फल मिलता है।

देवी दुर्गा के पाठ से रोग-शोक से मुक्ति
गुप्त नवरात्र में बनने वाले सिद्धिदायी योग में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी होगा। इस बार का गुप्त नवरात्र बहुत ही अच्छा संयोग लेकर आया है जो कई वर्षों बाद ऐसा सहयोग मिलता है। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती, देवी के विशिष्ट मंत्र का जाप, दुर्गा कवच, दुर्गा शतनाम का पाठ प्रतिदिन करने से रोग-शोक आदि का नाश होता है। व्यवसाय में वृद्धि, रोजगार, रोग निवारण आदि मनोकामनाओं के लिए इस नवरात्र में देवी की आराधना की जाती है।

जाने कब है कलश स्थापना का मुहूर्त

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गुप्त नवरात्रि का कलश स्थापना शनिवार 10 फरवरी 2024 को सुबह 6 बजे से 11 बजे तक शुभ रहेगा। इस समय घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। बाकी समय भी मध्यम शुभ रहेगा। मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान अन्य नवरात्रों की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा यानि पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए।

10 महाविद्या की करें आराधना
तंत्र विद्या के माध्यम से देखा जाए तो गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की आराधना की जाती है जिसे बड़े-बड़े तांत्रिक अच्छा संयोग का इंतजार करके इस कार्य को करते हैं। ईससे उनको जल्द ही सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं। अगर हम दश महा विद्या की बात करें तो गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं में मां काली देवी, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बंगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है। इस वर्ष पंचांग के अनुसार माघ माह की गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी 2024 से प्रारंभ हो रही है और 18 फरवरी 2024 तक यह पर्व काल चलेगा।

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