AKD।गिरीश तिवारी
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज सदर विधायक भूपेश चौबे ने डाला नगर पंचायत (पर्वतीय) के वार्ड संख्या-2 एवं 3 स्थित लगभग 50 से 55 वर्ष पुरानी मलिन बस्ती को उजड़ने से बचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। विधायक ने बताया कि इस बस्ती में 450 से 500 परिवारों के करीब 4 से 5 हजार लोग वर्षों से निवास कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि स्थानीय अल्ट्राटेक कंपनी द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत बस्ती हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे गरीब, दलित और अति पिछड़े वर्ग के हजारों लोगों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। विधायक ने मुख्यमंत्री से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप कर वार्ड संख्या-2 एवं 3 की इस बस्ती को उजड़ने से बचाने तथा प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जनपद वर्ष 1989 में मिर्जापुर से पृथक होकर अस्तित्व में आया। जिले के गठन के बाद इसका मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के नाम से जाना जाने लगा, जिसे अंग्रेजी शासनकाल की विरासत और प्रतीक के रूप में देखा जाता है। लंबे समय से सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, युवाओं और विभिन्न वर्गों द्वारा मुख्यालय का नाम बदलकर ‘सोनभद्र’ किए जाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। अब इस मांग को एक बार फिर नई मजबूती मिली है। सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक भूपेश चौबे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर रॉबर्ट्सगंज का नाम बदलकर सोनभद्र किए जाने का अनुरोध किया है। विधायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि जिले का नाम पहले से ही सोनभद्र है, जबकि मुख्यालय आज भी अंग्रेज शासक रॉबर्ट्स के नाम पर जाना जाता है। ऐसे में जिले की पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को ध्यान में रखते हुए मुख्यालय का नाम भी सोनभद्र किया जाना उचित होगा।विधायक ने पत्र में यह भी कहा है कि इस संबंध में सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, युवाओं, छात्रों और देशभक्त नागरिकों द्वारा लंबे समय से मांग की जाती रही है।

इतना ही नहीं, जिला प्रशासन की ओर से भी मुख्यालय का नाम परिवर्तन कर सोनभद्र किए जाने का प्रस्ताव शासन को पूर्व में भेजा जा चुका है।भूपेश चौबे ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए रॉबर्ट्सगंज का नाम बदलकर सोनभद्र किए जाने की कार्रवाई कराई जाए, ताकि जिले की पहचान उसके वास्तविक नाम और ऐतिहासिक गौरव के अनुरूप स्थापित हो सके।विधायक के इस पत्र के सामने आने के बाद एक बार फिर जिले में नाम परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें प्रदेश सरकार के निर्णय पर टिकी हैं कि इस लंबे समय से उठ रही मांग पर क्या फैसला लिया जाता है।
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