सोनभद्र: 40 हजार घनमीटर परमिट की खुली डकैती, विस्फोटक गायब राज्य की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल

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  • ( पब्लिक भारत
  • डेस्क ) सोनभद्र।
  • बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र से उभरा एक प्रकरण अब केवल अवैध खनन तक सीमित
  • नहीं है, बल्कि यह शासन प्रशासन और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देकर सामने आया है।
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( पब्लिक भारत डेस्क )


सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र से उभरा एक प्रकरण अब केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन प्रशासन और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देकर सामने आया है। एक शिकायतकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में ऐसे सनसनीखेज और खतरनाक तथ्य सामने आए हैं, जो यदि सत्य साबित हुए तो यह मामला सीधे तौर पर राज्य की आंतरिक सुरक्षा, सरकारी राजस्व और आम जनता के जीवन से जुड़ा गंभीर संकट बन जाएगा। आरोप है कि ग्राम बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र की आराजी संख्या 5432, रकबा 2.87 एकड़ में एक भी पत्थर निकाले बिना करीब 40 हजार घनमीटर ई-एमएमएम खनन परमिट जनरेट कर लिए गए।

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मौके की हकीकत यह है कि खनन क्षेत्र में पत्थर का नामोनिशान तक नहीं है, केवल पूरे लीज एरिया से मिट्टी हटाई गई है। इसके बावजूद कागजों में बड़े पैमाने पर खनन दर्शाकर परमिटों की खुलेआम कालाबाजारी की गई और उन्हें अवैध खनन माफियाओं को बेच दिया गया। मामले का सबसे खौफनाक और विस्फोटक पहलू यह है कि मौके पर बिना किसी ब्लास्टिंग के विस्फोटक सामग्री उठाई गई, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वह विस्फोटक कहां गया। शिकायत में सीधे सवाल उठाए गए हैं कि यह विस्फोटक किसके हाथों में पहुंचा क्या वह अवैध खनन माफियाओं को सौंपा गया या फिर किसी आपराधिक अथवा नक्सली गतिविधि में इस्तेमाल हुआ। विस्फोटक सामग्री का प्राप्तकर्ता उमेश सिंह कौन है, वह वैध ब्लास्टर है या केवल नाम का फोरमैन इसका कोई प्रामाणिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, जो पूरे प्रकरण को और भी संदिग्ध और भयावह बना देता है।शिकायतकर्ता का आरोप है कि आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बावजूद तत्कालीन खनन निरीक्षक मनोज कुमार ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने के बजाय पट्टा धारक के साथ साजिश कर पूरे मामले को दबा दिया। न शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किया गया, न ही किसी स्वतंत्र गवाह या तकनीकी साक्ष्य को जांच में शामिल किया गया। जांच रिपोर्ट में असली आरोपों को नजरअंदाज कर महज औपचारिक और अविश्वसनीय रिपोर्ट लगाकर पट्टा धारक को क्लीन चिट दे दी गई। गंभीर सवाल यह भी है कि जनपद में हाल ही में अवैध खनन के चलते हुई भीषण दुर्घटना में सात मजदूरों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद खनन विभाग पर कोई असर नहीं पड़ा। उल्टे आरोप है कि मार्च 2026 में तीसरे वर्ष के लिए फिर से ई-एमएमएम परमिट अपलोड कराने की तैयारी चल रही है, मानो मौतें भी खनन माफिया के रास्ते की रुकावट न हों।

शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि यह प्रकरण केवल अवैध खनन नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व की संगठित लूट, खनन माफिया को संरक्षण और कानून व्यवस्था से सीधा टकराव है। यदि समय रहते इस मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच नहीं हुई, तो सोनभद्र धीरे-धीरे खनन माफिया और विस्फोटक तंत्र का सुरक्षित ठिकाना बन सकता है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कराई जाए, दोषी पट्टा धारक व संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कठोरतम कार्रवाई हो, भारी अर्थदंड लगाया जाए और संबंधित खनन पट्टा तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी खतरनाक और जानलेवा घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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