सुविधा नहीं तो वोट नहीं बउली टोला में आदिवासी समाज का फूटा गुस्सा, बिजली-पानी-सड़क की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन

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डाला/सोनभद्र(AKD/गिरीश तिवारी)-
चोपन विकासखंड क्षेत्र के बारी गांव के बउली टोला बिल्ली मारकुंडी में शुक्रवार को आदिवासी समाज का सब्र आखिर टूट गया। दशकों से उपेक्षा झेल रहे ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नारे और चेहरे पर गुस्सा बिजली नहीं तो वोट नहीं, सड़क नहीं तो वोट नहीं, पानी नहीं तो वोट नहीं की आवाज़ों से पूरा इलाका गूंज उठा।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय नेता हाथ जोड़कर वोट मांगने आते हैं, लेकिन जीतने के बाद टोले में झांकने तक नहीं आते।

कच्ची सड़कों पर कीचड़, टूटे झोपड़े, गंदा पानी और अंधेरे में जिंदगी यही इस टोले की हकीकत है। बरसात में रास्ते दलदल में बदल जाते हैं, बीमार बुजुर्गों और बच्चों को चारपाई पर उठाकर सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने साफ़ चेतावनी दी कि अगर अब उनकी बुनियादी सुविधाओं की मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे किसी को वोट नहीं देंगे।ग्रामीणों से बात करने पर महिला नीलम सिंह ने बताया कि हमारे टोले में बिजली नहीं है।

बरसात में पूरा रास्ता कीचड़ और पानी में डूब जाता है, बच्चे गिर-गिरकर स्कूल जाते हैं। साफ़ पानी नहीं मिलता, बीमार होने पर हमें अपने बुजुर्गों को चारपाई पर उठाकर सड़क तक ले जाना पड़ता है। अगर सड़क, बिजली और पानी की समस्या नहीं सुलझी, तो हम वोट नहीं देंगे। हम गरीब हैं, पर इंसान हैं सरकार हमें सिर्फ कागजों पर दिखाती है। 65 वर्षीय बुजुर्ग काशी ने बताया कि बारी से बस्ती तक जाने वाला कच्चा रास्ता बरसात में दलदल बन जाता है। हर साल लोग बीमार पड़ते हैं या चोट खाते हैं। अधिकारी और जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव में आते हैं, फिर गायब हो जाते हैं। अब हम आंदोलन और तेज करेंगे बिना सुविधा वोट नहीं। वहीं बुजुर्ग महिला फुलकुमारी ने आक्रोश जताया यहाँ न बिजली है, न पानी, न सड़क, न आवास, न शौचालय। विधायक संजय गोंड से शिकायत की थी, उन्होंने देखने का वादा किया पर हुआ कुछ नहीं।

ग्राम प्रधान रेखा देवी चुनाव के बाद गाँव नहीं आईं। किसी कागज पर मोहर लगवाने में भी महीना लग जाता है क्योंकि प्रधान अपने घर से बाहर नहीं निकलतीं। अगर सुविधाएं नहीं मिलीं, तो हम वोट नहीं देंगे, चाहे कोई भी सरकार आए। ग्रामीणों ने डीएम से क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान तत्काल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अब यह सिर्फ मांग नहीं, बल्कि हक की लड़ाई है और अगर उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई, तो आने वाले चुनाव में यह गुस्सा वोट नहीं के रूप में सामने आएगा। प्रदर्शन करने वालों में भुवनेश्वर, फूल कुमारी, चंद्रावती देवी, मानकुंवर, रीता देवी, नन्हकी देवी, सुमित्रा, पार्वती देवी, नीतू, कविता, राजमती, राम सुमेर, भगवान दास, सोनू, पूनम, लीलावती, छोटे लाल गोंड़ और अन्य ग्रामीण मौजूद रहे ।

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