सोनभद्र। (AKD।गिरीश तिवारी)
रामनवमी का पावन पर्व इस वर्ष 27 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा और इस दिन भगवान राम की विधि-विधान से पूजा के साथ हनुमान पताका फहराने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। आचार्य प्रशान्त मिश्र (वैदिक) के अनुसार के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व केवल रामभक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि की आराधना के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है, क्योंकि हनुमान जी को राम के परम भक्त और संकटों को हरने वाला देवता माना गया है।धार्मिक मान्यता है कि रामनवमी के दिन घरों में हनुमान पताका फहराना विजय, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। इसे “विजय पताका” कहा जाता है और यह विश्वास किया जाता है कि जहां यह ध्वज स्थापित होता है, वहां भगवान राम और हनुमान जी की कृपा बनी रहती है तथा नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है।पौराणिक कथा के अनुसार ने महाभारत युद्ध के दौरान के रथ पर हनुमान जी को ध्वज के रूप में स्थापित कराया था। युद्ध के समय हनुमान जी उस ध्वज पर विराजमान रहकर अर्जुन की रक्षा करते रहे। युद्ध समाप्त होने के बाद जब श्रीकृष्ण और अर्जुन रथ से उतर गए, तब हनुमान जी भी ध्वज से प्रस्थान कर गए और उसी क्षण रथ जलकर भस्म हो गया। श्रीकृष्ण ने बताया कि युद्ध के दौरान रथ कई बार नष्ट हो चुका था, लेकिन उनके और हनुमान जी के प्रभाव से वह सुरक्षित बना रहा।इसी पौराणिक घटना के कारण हनुमान पताका को विजय और रक्षा का प्रतीक माना गया है और यही कारण है कि रामनवमी के दिन इसे घरों पर फहराने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है, संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
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