गिरीश तिवारी /AKD
सोनभद्र। मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश का सपना संजोए 1614 अभ्यर्थियों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट यूजी-2026 को लेकर सोनभद्र में जिला प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के व्यापक इंतजाम किए। जनपद के चार परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजकर 15 मिनट तक परीक्षा आयोजित की गई। प्रशासन ने निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा का दावा करते हुए सीसीटीवी निगरानी, जैमर, फ्रिस्किंग और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की व्यवस्था की। हालांकि भीषण गर्मी के बीच परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों के साथ पहुंचे अभिभावकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन की ओर से छाजन और प्रतीक्षा स्थल की व्यवस्था के दावे किए गए थे, लेकिन मौके पर ऐसी सुविधाएं नजर नहीं आईं, जिससे लोगों को तेज धूप में घंटों इंतजार करना पड़ा। फिलहाल प्रशासन परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने का दावा कर रहा है, लेकिन अभिभावकों की शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी समान रूप से ध्यान देने की जरूरत है।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत पर्याप्त पुलिस बल के साथ सेक्टर मजिस्ट्रेट और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की भी तैनाती की गई थी। परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष माहौल में संपन्न कराने के लिए हर स्तर पर निगरानी रखी गई। वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी और उमस के बीच परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों के साथ आए अभिभावकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रशासन की ओर से मुख्य प्रवेश द्वारों के पास छाजन और प्रतीक्षा स्थल बनाए जाने के दावे किए गए थे, लेकिन कई केंद्रों पर ऐसी कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दी। नतीजा यह रहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों के परीक्षा केंद्र से बाहर आने तक तेज धूप में ही इंतजार करना पड़ा। सोनभद्र में नीट यूजी परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर के दो केंद्रों सहित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और आदर्श इंटर कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।

सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जैमर भी लगाए गए। प्रवेश द्वारों पर अभ्यर्थियों की सघन जांच की गई और प्रतिबंधित सामग्री को अंदर ले जाने पर पूरी तरह रोक रही। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी परीक्षा के दौरान कम से कम बैठने और छाया की व्यवस्था होनी चाहिए थी। घंटों तक धूप में खड़े रहने से उन्हें काफी परेशानी हुई। हालांकि परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन व्यवस्थाओं के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर सवाल खड़े कर गया।
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